
समरनीति न्यूज, बांदा: बांदा में स्टेडियम या सजा घर? हर किसी के मन में यही सवाल उठ रहा है। दरअसल, तपते बांदा के स्टेडियम में खिलाड़ियों की प्यास पर लापरवाही भारी पड़ रही है। हाल यह है कि स्टेडियम सजा घर बना गया है। बांदा में 16 अप्रैल 2026 को तापमान पूरे देश में सबसे ज्यादा 44.4 डिग्री सेल्सियस रहा। उसी बांदा खेल स्टेडियम में खिलाड़ियों को पीने का पानी नहीं है। इसे अधिकारियों का नकारापन न कहें तो क्या कहें? स्टेडियम या सजा घर, समझ नहीं आता।
कुछ भी पूछो, अधिकारियों के पास एक ही जवाब बजट नहीं

खेल अधिकारियों ने लापरवाही की ऐसी चादर ओढ़ रखी है कि उन्हें कुछ भी दिखाई ही नहीं दे रहा। उन्हें इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि खिलाड़ियों को कितनी दिक्कतें का सामना करना पड़ रहा है।
अफसरों की लापरवाही से सरकार के प्रयासों पर पलीता
सवाल उठ रहे हैं कि जो अधिकारी खिलाड़ियों को पानी तक उपलब्ध न करा सकें, उनकी तैनाती का क्या औचित्य है?

अधिकारियों की यह घोर लापरवाही सरकार की छवि को खराब कर रही है। सरकार खेलकूद को बढ़ावा दे रही है और बांदा में खेल अधिकारी पलीता लगा रहे हैं।
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स्टेडियम का हाल यह है कि गेट से लेकर आखिरी छोर तक अव्यवस्था ही अव्यवस्था दिखाई देती है। गंदगी और जलभराव आम बात है। ग्राउंड में धूल उड़ रही है। वाटरिंग की कोई व्यवस्था नहीं है।
खराब वाटर कूलर-कोने में टूटी-फूटी गंदी गरम पानी की टंकी..

दरअसल, स्टेडियम में लगा एक मात्र वाॅटर कूलर महीनों से खराब पड़ा है। इसे ठीक कराने या नए वाॅटर कूलर अधिकारियों की प्राथमिकता में ही नहीं है। पूरे स्टेडियम में बैडमिंटन हाॅल के ऊपर एक पुरानी टंकी रखी है।
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इसका गंदा सप्लाई वाला पानी पीने के लिए खिलाड़ी मजबूर होते हैं। अधिकारियों ने अपने लिए मिनरल वाटर की बोतलें रख रखी हैं।
ग्राउंड में यहां-वहां भरा कूड़ा, साफ-सफाई व्यवस्था चौपट
सफाई की कोई व्यवस्था नहीं है। ग्राउंड में जगह-जगह कूड़ा पड़ा है। ट्रैक के किनारे जलभराव आसानी से देखा जा सकता है। अगर कोई खिलाड़ी धोखे से गिर जाए तो बचना मुश्किल हो जाए।
साहब आते हैं घूमकर खिसक लेते हैं.. बाकी बजट का रोना
स्टेडियम में बीते कई वर्षों से जिला क्रीड़ा अधिकारी की नियुक्ति नहीं है। इसका प्रभार मुख्यालय पर तैनात एसडीएम के पास है। एक खिलाड़ी ने बताया कि साहब रोज शाम को घूमने स्टेडियम तो आते हैं, मगर घूमकर व्यवस्था कभी नहीं देखते।
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कभी यह नहीं देखते कि उनकी यहां भी कई जिम्मेदारियां हैं। उप क्रीड़ा अधिकारी श्रीमती कल्पना कमल का कहना है कि उनकी ओर से समस्या को लेकर अधिकारियों को पत्र लिखा जा रहा है।
बजट की समस्या के चलते संसाधनों का अभाव है। उधर, स्टेडियम में घूमने आने वाले एक बुर्जग का कहना है कि वह कई वर्षों से आ रहे हैं।
बुजुर्ग बोले-पहले कभी नहीं रहे स्टेडियम के इतने बुरा हालात
लेकिन स्टेडियम के ऐसे बुरे हालात कभी नहीं रहे जो वर्तमान में हैं। उम्मीद है कि बांदा जिलाधिकारी इस समस्या पर ध्यान देंगी और खिलाड़ियों को पानी उपबल्ध होगा।
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