
मनोज सिंह शुमाली, ब्यूरो: राजधानी लखनऊ में भाजपा के ब्राह्मण विधायकों के ब्राह्मण सहभोज के नाम पर जमघट से पार्टी कहीं न कहीं असहज हुई है। अब हिंदूत्व की राजनीति वाली भारतीय जनता पार्टी के पुराने नेता और नए नवेले प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी ने बयान देकर सबको जोड़ने की कोशिश की है। दरअसल, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी ने जाति विशेष के जनप्रतिनिधियों की बैठक को लेकर विधायकों को आगाह किया है।
ऐसी बैठकों को भाजपा के संविधान व आदर्शों के विपरीत बताया
नए प्रदेश अध्यक्ष ने कहा है कि नकारात्मक व जातिवादी राजनीति का शिकार न बनें। प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी ने जनप्रतिनिधियों से स्पष्ट कहा है कि वे जातिवादी राजनीति का शिकार न हों।
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प्रदेश अध्यक्ष ने कहा है कि मीडिया में प्रसारित जाति विशेष के भाजपा जनप्रतिनिधियों की बैठक या ऐसा कोई भी कृत्य भाजपा के संविधान एवं आदर्शों के अनुरूप नहीं है। कहा कि भाजपा सिद्धांतों और आदर्शों पर चलने वाला एक राजनीतिक दल है।
सभी जनप्रतिनिधियों को चेताया, दोहराने पर होगी कार्रवाई
भाजपा और उसके कार्यकर्ता परिवारवाद या वर्ग विशेष की राजनीति में भरोसा नहीं करते हैं। प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि बैठक करने वाले जनप्रतिनिधियों से बातचीत की गई है।
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सभी से साफ कहा गया है कि ऐसी गतिविधियां भाजपा की संवैधानिक परंपराओं के अनुकूल नहीं हैं। आगे से सतर्कता बरतें। प्रदेश अध्यक्ष ने कहा है कि भविष्य में अगर किसी जनप्रतिनिधि ने ऐसी गतिविधायां दोहराईं तो अनुशासनहीनता माना जाएगा और कार्रवाई की जाएगी।
बसपा-सपा-कांग्रेस का नाम लेकर कहा, अंधकारमय भविष्य
कहा कि प्रदेश में लगातार बदल रहे राजनीतिक परिदृश्य में जातिवाद की राजनीतिक करने वाले बसपा, सपा और कांग्रेस जैसे दलों का भविष्य अंधकारमय है।
नया नहीं..चुनाव से पहले सभी दल साधते जातिगत समीकरण
बहरहाल, भले ही बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष का बयान जातिगत सम्मेलन से दूर रहने वाला हो, लेकिन बीते चुनावों से पहले बीजेपी में ही जातिगत सम्मेलनों को दूसरा नाम देकर आयोजित किया जाता रहा है। हालांकि, अकेले बीजेपी ही नहीं सभी राजनीतिक दल चुनाव आते ही जातिगत समीकरणों को साधने में जुट जाते हैं।
वैसे भी राजनीतिक में ‘डिनर डिप्लोमेसी’ का काफी महत्व
इसके लिए सभी राजनीतिक पार्टियां वाकयदा अलग-अलग जातियों के अलग-अलग नाम देकर सम्मेलन कराती आई हैं। वैसे भी राजनीतिक में ‘डिनर डेप्लोमेसी’ का काफी महत्व रहता है। शायद इसी से प्रभावित होकर बीजेपी के ब्राह्मण नेताओं ने सहभोज का आयोजन किया होगा। विधानसभा चुनाव की धमक का एहसास होते ही राजनीतिक दलों के इस तरह के सहभोज आयोजन आम बात हैं।
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