
समरनीति न्यूज, ब्यूरो (लखनऊ): कांग्रेस ने लगभग डेढ़ दशक बाद एक बार फिर महिला एवं ब्राह्मण नेता आराधना मिश्रा को उत्तर प्रदेश का प्रदेश अध्यक्ष बनाया है। इससे पहले 2007 में रीता बहुगुणा जोशी कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष बनी थीं। उनके नेतृत्व में 2009 लोकसभा चुनाव में कांग्रेस ने 21 सीटें जीती थीं, जबकि 2012 के विधानसभा चुनाव में 28 सीटें जीतीं। तब सपा कांग्रेस का गठबंधन नहीं था। रीता जोशी ने 2016 में बीजेपी ज्वाइन कर ली थी।
अब कांग्रेस के अगले कदम पर सबकी निगाहें
कांग्रेस ने प्रदेश अध्यक्ष तो बदल दिया है। मगर अब सबकी निगाहें कांग्रेस के अगले कदम पर है कि क्या समाजवादी पार्टी से कांग्रेस का गठबंधन होगा। वरिष्ठ पत्रकारों की मानें तो कांग्रेस की रणनीति जो सामने आ रही है, उसके हिसाब से कांग्रेस का फोकस 2027 के विधानसभा चुनाव से ज्यादा लोकसभा चुनाव 2029 पर नजर आ रहा है।
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दरअसल, एक समय था कि कांग्रेस का वोट बैंक तीन समूहों से बनता था-दलित, मुस्लिम और ब्राह्मण। उत्तर प्रदेश में कांग्रेस ने संगठनात्मक तौर पर इसकी शुरुआत कर दी है। सबसे पहले डॉ. राजेंद्र पाल गौतम जो कि एक दलित नेता हैं, को प्रदेश का प्रभारी बनाया। दूसरे कदम से कांग्रेस ने ब्राह्मण और मुस्लिम पर दांव लगाया है।
कांग्रेस और सपा के गठबंधन को लेकर चर्चाएं
पार्टी ने वरिष्ठ कांग्रेस नेता प्रमोद तिवारी की बेटी और रामपुर खास की विधायक आराधना मिश्रा ‘मोना’ को प्रदेश अध्यक्ष बनाया। वहीं सहारनपुर के सांसद इमरान मसूद को कार्यकारी अध्यक्ष बनाया है। डॉ. गौतम अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (AICC) के अनुसूचित जाति (SC) विभाग के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं।
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कांग्रेस आलाकमान ने उत्तर प्रदेश में सामाजिक न्याय के एजेंडे को मजबूत करने और दलित, पिछड़े व शोषित वर्गों के बीच पार्टी का जनाधार बढ़ाने की रणनीति के तहत ही उन्हें यूपी कांग्रेस का प्रभारी नियुक्त किया है। वहीं आराधना मिश्रा तीसरी बार विधानसभा पहुंची हैं।
2014 में पहली बार विधायक बनी थीं मोना
पहली बार 2014 के उपचुनाव में रामपुर खास विधानसभा सीट से जीतकर विधायक बनी थीं। यह उपचुनाव उनके पिता प्रमोद तिवारी के राज्यसभा सदस्य चुने जाने के बाद खाली हुई सीट पर हुआ था। उनके पिता प्रमोद तिवारी समाजवादी पार्टी के आशीर्वाद से ही राज्यसभा पहुंचे थे।
इमरान मसूद का सपा से ‘हेट एंड लव’ रिलेशन
इमरान मसूद का सपा से हेट एंड लव वाला रिलेशन रहा है। फिलहाल उनके बयान दिखा रहे हैं कि मुस्लिम वोट बैंक की जितनी जरुरत समाजवादी पार्टी को है उतनी ही कांग्रेस को भी है। इन सबके बीच मोल-तोल की राजनीति से ही कांग्रेस अगले लोकसभा चुनाव की तैयारी करेगी, क्योंकि 2027 तो एक बहाना है निशाना तो 2029 है।
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