Wednesday, April 29सही समय पर सच्ची खबर...

भीषण गर्मी वाला बांदा और जलसंस्थान के संवेदनहीन अधिकारी, जनता बेहाल..

Banda Jal Sansthan with God's trust: 'Sahab' is sitting in Chitrakoot and providing water to people from laggie

समरनीति न्यूज, बांदा: बांदा जलसंस्थान अधिकारियों की लापरवाही किसी से छिपा नहीं है। शहर में दूषित पेयजल की आपूर्ति, सप्लाई समय पर न करना, शिकायतों पर फोन न उठाना। इन सब बातों को लेकर आम जनता में जलसंस्थान की छवि बेहद खराब बनती जा रही है। इसकी मुख्य वजह मौजूदा समय में तैनात अधिकारियों की पेयजल जैसे मुद्दे पर संवेदनहीनता है।

महाप्रबंधक के न रहने से पटरी से उतरी पूरी व्यवस्था

अधिकारी पानी आपूर्ति को लेकर भी कागजी खानापूर्ति तक सीमित रहते हैं। 28 अप्रैल को बांदा जलसंस्थान के एक्सईएन शिवराज वर्मा को उनके मोबाइल नंबर-(6394455260) पर दो बार शाम 7:21 और 7:42 बजे काॅल की गईं।

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ताकि पता चल सके कि 29 अप्रैल को पूर्व सूचना के आधार पर स्वराज काॅलोनी, क्योटरा, सिविल लाइन, शांतिनगर और दूसरे इलाकों में आपूर्ति बंद रहेगी या नहीं? ऐसा इसलिए क्यों कि एक बार इसमें बदलाव हो चुका है। 24 की जगह 29 किया गया है।

भीषण गर्मी वाले बांदा में संवेदनहीन अधिकारी

यह सवाल लाखों की आबादी वाले आधे बांदा शहर से जुड़ा है। दोनों बार उनका फोन नहीं उठा। इसके बाद व्हाट्सअप पर मैसेज करके इस संबंध में पूछा गया।

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उसका भी जवाब नहीं दिया गया। अब आप समझ सकते हैं कि जनहित से जुड़े सवाल को लेकर जलसंस्थान के अधिकारी कितने संवेदनशील हैं। दरअसल, अधिकारियों की यह मनमर्जी वाली कार्यशैली ऐसे ही नहीं है।

एक्सईएन के पास था चार्ज-व्यवस्था लड़खड़ाई रही

इसकी वजह है कि बीते दिनों काफी समय जलसंस्थान में महाप्रबंधक पद खाली रहा था। पूर्व महाप्रबंधक सेवानिवृत हो गए थे। हालांकि, नए महाप्रबंधक आ गए हैं। इससे पहले चार्ज अधिशाषी अभियंता पर रहा था। यही वजह रही कि पेयजल आपूर्ति को लेकर भी हालात खराब रहे।

बांदा में दूषित पेयजल-अनियमित आपूर्ति..

बताते चलें कि शहर में दूषित पेयजल आपूर्ति और समय पर पानी न आने जैसी समस्याएं किसी छिपी नहीं हैं। विभागीय सूत्र बताते हैं कि अधिशाषी अभियंता से ज्यादा विभाग की जिम्मेदारी एक ऐई के कंधों पर थी। हालांकि, अब नए महाप्रबंधक आ गए हैं।

यही वजह है कि पूरे जलसंस्थान विभाग का सिस्टम खराब हो गया है। कुछ दिन पहले जेल रोड पर नई बनी सड़क खुदवाकर जलसंस्थान के यही अधिकारी चलते बने थे। जनता आज भी सड़क टूटने से परेशान हैं।

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