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बांदा जिपं : यहां भ्रष्टाचार के दलदल में सभी दल एक! बिना जांच-पड़ताल के दिए जा रहे ठेके

Banda : Tenders are canceled again and again, what is truth behind scenes in District Panchayat

मनोज सिंह शुमाली, बांदा : धंधे के गठबंधन में भाजपा संग सपा-कांग्रेस और बसपा भी। कोई किसी से कम नहीं है और सभी पर्दे के पीछे-एक दूसरे के मददगार भी हैं, लेकिन आश्चर्य की बात यह है कि राजनीतिक मैदान में सभी एक-दूसरे पर आरोपों की बौछार करते नजर आते हैं। उत्तर प्रदेश में जल्द ही 10 सीटों के लिए उप चुनाव होने वाले हैं। सभी दल अपने-अपने कील-काटें दुरुस्त करने में लगे हैं।

धंधे के गठबंधन ने सबको बांध रखा

भाजपा, सपा और कांग्रेस अपने-अपने सहयोगियों के साथ चुनावी रणनीति बना रहे हैं। हाई लेबल मीटिंग हो रही हैं। लेकिन दलों से जुड़े सूत्र बताते हैं कि बुंदेलखंड के बांदा में अलग तरह की हवा बह रही है। यहां धंधे का एक ऐसा गठबंधन बना हुआ है जो भाजपा की जिला पंचायत में प्रमुख विपक्षी राजनीतिक दलों को एकता के सूत्र में बांधे हैं।

हर साल सुर्खियों में रहता है यह ठेका

इस कारण अद्भुत एकता के दर्शन हो रहे हैं। दरअसल, खनिज तहबाजारी के ठेके को लेकर बांदा जिला पंचायत हमेशा से सुर्खियों में रही है। विश्वस्त्र सूत्रों का कहना है कि चेहरा भले की इस ठेके में किसी एक कंपनी या व्यक्ति का सामने हो, लेकिन पर्दे के पीछे प्रमुख दलों से जुड़ा कोई न कोई खिलाड़ी जरूर है।

बीते कुछ वर्षों में गिरती गई कीमत

इन्हीं खिलाड़ियों के खेल से इस ठेके की कीमत साल दर साल कम होती जा रही है। शासन जांच करा लें तो ठेका तो निरस्त होगा ही, साथ में कई लोगों पर कार्रवाई की गाज भी गिरेगी। लगभग 10 करोड़ का यह ठेका पिछले 2 से 3 साल में बेहताशा नीचे गिरा है। फिलहाल तो यह ठेका यूपी की मौजूदा राजनीतिक के संदर्भ में अद्भुत एकता की मिसाल कायम कर रहा है। (पढ़ना जारी रखें..)

भले ही यूपी में भाजपा और कांग्रेस या सपा के बड़े नेता एक-दूसरे पर बयानबाजी के बड़े-बड़े तीर चला रही हो, लेकिन सूत्रों की माने तो बांदा में सभी दलों के नेता कम से कम इस तहबाजारी के इस धंधे में एक छत्रछाया में खड़े होकर काम कर रहे हैं। यही बात चर्चा की वजह बनी है। कुल मिलाकर महान कवि हरीवंश राय बच्चन की मशहूर कविता ‘मेल कराती मधुशाला…।’

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