
समरनीति न्यूज, लखनऊ: यूपी भाजपा संगठन में 2027 चुनावों से पहले बड़े बदलाव की तैयारी है। भाजपा में डेढ़ दशक बाद अब प्रदेश संगठन में बड़े बदलाव की आहट है। दरअसल, 2010 से अबतक यूपी भाजपा संगठन में कई पदाधिकारी महामंत्री, उपाध्यक्ष, मंत्री और प्रवक्ता पदों पर हैं। वहीं इस अवधि में 7 प्रदेश अध्यक्ष बदल चुके हैं। मगर यूपी भाजपा संगठन में अधिकांश पदाधिकारियों की जिम्मेदारी बनी है।
नए प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी बदलाव को लेकर गंभीर
हालांकि, विधानसभा चुनाव 2027 को देखते हुए नए प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी संगठन में बड़े फेरबदल पर काम कर रहे हैं। पार्टी सूत्रों के अनुसार अबकी बार यह बदलाव जमीनी स्तर पर भी दिखाई देगा।
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संगठन में इस बड़े बदलाव के लिए जातीय, क्षेत्रीय और सामाजिक संतुलन पर खास ध्यान है। दरअसल बीते वर्षों में कई प्रदेश अध्यक्ष यूपी भाजपा में बदले गए। लेकिन संगठन के प्रमुख पदों पर पुराने चेहरों पर दांव खेला गया।
कानपुर-बुंदेलखंड, पश्चिम और काशी पर भी फोकस
इससे पार्टी के क्षेत्रीय और सामाजिक संतुलन पर असर पड़ा। बताते चलें कि सूर्य प्रताप शाही के अध्यक्ष बनने के बाद से कुछ जिलों से संगठन में दो से चार पदाधिकारी ही शामिल हुए।
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वहीं कानपुर-बुंदेलखंड, ब्रज और पश्चिमी यूपी के साथ-साथ काशी और अवध में कई जिलों में अपेक्षित प्रतिनिधित्व नहीं मिल सका। यही वजह रही कि कार्यकर्ताओं में असंतोष बढ़ा है। पार्टी सूत्रों की माने तो भाजपा संगठन के सभी 6 क्षेत्रीय अध्यक्षों को बदलने की संभावन है।
कई पदाधिकारी विधायक बन चुके और पद पर..
इनमें कानपुर-बुंदेलखंड, काशी, गोरक्ष, पश्चिम, अवध और ब्रज शामिल हैं। साथ ही जो पदाधिकारी विधायक बन चुके हैं, उन्हें भी बदला जाएगा। जैसे कई पदाधिकारी राज्यसभा, विधानसभा या विधान परिषद के सदस्य बन गए हैं। महामंत्री या उपाध्यक्ष भी बने हैं।
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उन्हें बदलने की तैयारी है। इनमें कई नेता सूर्य प्रताप शाही, लक्ष्मीकांत वाजपेई, केशव प्रसाद मौर्य, स्वतंत्र देव सिंह और महेंद्र नाथ पांडेय के कार्यकाल से संगठन में भी बने हैं। वहीं संगठन में संभावित बदला की आहट से कई पदाधिकारी कुर्सी बचाने में जुट गए हैं।
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