
वंदना श्रीवास्तव, कानपुर: कानपुर किडनी कांड मामले की मुख्य रोगी पारुल और डोनर आयुष को हैलट से लखनऊ रेफर कर दिया गया है। दोनों को बेहतर इलाज के लिए लखनऊ के डॉ. राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान रेफर किया गया है। बताते हैं कि जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने संसाधनों की कमी और मामले की गंभीरता को देखते हुए यह कदम उठाया है।
बेहतर इलाज के लिए किया रेफर
उधर, मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. संजय काला का कहना है कि पारुल की प्रत्यारोपित किडनी धीरे-धीरे काम करने लगी है। कहा है कि सीरम क्रेटेनिन के स्तर में कमी भी आई है। बताते चलें कि प्राचार्य ने सीएमओ को पत्र लिखकर स्पष्ट किया है कि किडनी प्रत्यारोपण के रोगी के इलाज के लिए मेडिकल कालेज में पर्याप्त संसाधन नहीं हैं।
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इस मामले में सबसे बड़ी चुनौती यह है कि मरीज का कोई भी मेडिकल रिकार्ड उपलब्ध नहीं है। किडनी बदलने के दौरान मरीज को कौन सी दवाएं दी गईं। इसकी कोई जानकारी नहीं है।
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हालांकि, अब तक दोनों डोनर और रिसीवर का इलाज हैलट में हो रहा था। बता दें कि पारुल तोमर (43) गुर्दा रोग विशेषज्ञ डॉ. समीर गोविल की देख-रेख में थीं। वहीं, डोनर आयुष चौधरी (24) को यूरो सर्जन डॉ. अनिल जे. वैद्य की देख-रेख में रखा गया था। डाॅक्टरों ने आयुष की स्थिति फिलहाल स्थिर बताई है।
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